क़लम एक कुदाल जुड़िए संस्कृति से ...

संयुक्त परिवार के बिना 0

संयुक्त परिवार के बिना

बहुत सुँदर पंक्तियाँ संयुक्त परिवार के बिनावो पंगत में बैठ केनिवालों का तोड़ना,वो अपनों की संगत मेंरिश्तों का जोडना,वो दादा की लाठी पकड़गलियों में घूमना,वो दादी का बलैया लेनाऔर माथे को चूमना, सोते वक्त...

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अनुभव अनुभव कैसे बनता

अनुभव अनुभव कैसे बनता है और उससे भी ज्यादा यह की अनुभव को लिखते किन शब्दों में है.. चेतना का अनुभव और उसकी व्याख्या दोनों का। जब तक विज्ञान स्पष्टता से अपनी सीमाये नहीं...

रंग बदलते देखा है 0

रंग बदलते देखा है

सुन्दर कविता जिसके अर्थ काफी गहरे हैं……..मैंने .. हर रोज .. जमाने को ..रंग बदलते देखा है ….उम्र के साथ .. जिंदगी को ..ढंग बदलते देखा है .. !!वो .. जो चलते थे ..तो...

धम्म ध्वज 0

बौद्धों का धम्मध्वज

बौद्धों का धम्मध्वज जैसा है वैसा ही क्यों है? 8 जनवरी, 1880 बौद्ध जगत में विशेष महत्व का दिन है क्योंकि इसी दिन ” धम्म ध्वज ” की स्थापना हुई थी। यह धम्म ध्वज...

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हम लोग मानवीकरण के

“हम लोग मानवीकरण के छोटे-छोटे टापुओं पर रहते हैं। ज़्यादातर लोगों के पास मानवीकरण के महाद्वीप तक नहीं हैं , पृथ्वी तो फिर दूर की बात रही।” वह मुझसे कहता है। बरसात के कारण...

जब जब तुम मेरे 0

जब जब तुम मेरे

जब जब तुम मेरेसाथ होती हो,वो हर पलबहुत सा सुहाना लगता है,अमावस्या की अर्धरात्रि में भी,तुम पूर्णिमा का चाँदजैसे सी चमकती हो,तेरी पायल की छन् छन्नाहट से,आसपास सब संगीतमय हो जाता है, जब जब...

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