Category: कविता

कविताओं द्वारा  प्रमुख मुद्दों पर विचार एवं विश्लेषण

0

अपना घर अपना होता

अपना घर अपना होता है।महीने के किराए कीदिक्कत नहीं होती,हर छोटी चीज कीचिंता नहीं होती,कहीं से लौटो तोअलग सा सुकून मिलता है।क्यूंकि अपना घरआखिर अपना होता है। अपना घर अपना होता है।बच्चों को दीवार...

0

याद रखेंगे युगों तक

तुम भूल गए पर हमयाद रखेंगे युगों तक,हम पर दमन का दास्तांपहुंच गया हैं अब लोगों तक।इंसान तो क्या हमारे तकलीफ मेंये तपते सड़कें भी रोयी थी,हमारे मासूम बेटे और बेटीयांइन्हीं राहों में चिर...

0

भूलना उनकी आदत हैं

हजारों शताब्दियों कीशोषण दमन को,चंद मीठी बातों में भूल जाते हैं,इन्हें मुक्ति से कमजुल्म से मोहब्बत है,क्योंकि भूलना इनकी आदत हैं।कभी जात पर, कभी मजहब पर,इनकी लहू बहता हैं सड़को पर,वाकिफ़ हैं दुश्मन की...

0

आदिवासियों के गाँवों में

आओ चलते हैं घने जंगलों केआदिवासियों के गाँवों में,जीते हैं पल पलजो संगीनों के छाओं में।काले शरीर पर वस्त्र कमअधिक कष्ट के निशान हैं,सदियों से गुमनामये छोटे छोटे किसान हैं। विकास की हवा कभीचली...

0

एक प्यारी सी घरवाली

बेशक घर में होतीएक प्यारी सी घरवाली हैफिर भी दिल में रहतीथोड़ी सी जगह ख़ाली हैलोग समझते हैं सालीतो होती आधी घरवाली हैलेकिन आजकल ये जगहबाहरवाली ने संभाली हैबिना उसके फीकी होलीऔर काली दीवाली...

1

आप बीती तुम कहो

आप बीती तुम कहोमुझे मेरी सुनाने दोआओ पास मेरे यापास मुझे तुम आने दोखूब गुजरेगी जब मिलबैठेंगे दीवाने दोसचमुच तुम सुंदर हो बहुतवो नहीं तुम्हारे काबिल थामुट्ठी से फिसली रेत साअब उसको तुम जाने...

error: Content is protected !!