Category: कविता

अब मैं अभागा किसान 0

अब मैं अभागा किसान

अब मैं अभागा किसानराशन की कतारों में नज़र आता हूँ..खेतिहर मजदूर अपनेखेतों से बिछड़ने की सज़ा पाता हूँ,साहब देखो इतनीमहंगाई के बाज़ार से कुछ लाता हूँ.. अब मैं अभागा किसानमैं किस्मत का माराअपने बच्चों...

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हमेशा मां को देखा

मां के लिए क्या कहूं,मां ख़ुद में ही पूर्ण हैजीवन के हर किरदार में मां सम्पूर्ण हैं,बचपन से लेकर अब तकहमेशा मां को देखाजो हर एक काम में निपुण हैं,पुत्री के रूप में पिता...

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उसने अपना घर बनाया

उसने अपना घर बनायाऔकात तो जन्म सेही नहीं छोड़ी थी आपने।उसने घास फूस का घर बनाया।आपने उसे तोड़ दिया।उसने गारा गोबर से घर बनाया।आपने उसे तोड़ दिया।उसने कच्ची ईंटों से घर बनाया।आपने उसे तोड़...

काशी की कशमकश 0

यह नदियों का मुल्क

यह नदियों का मुल्क है,पानी भी भरपूर है ।बोतल में बिकता है,पन्द्रह रू शुल्क है।यह शिक्षकों का मुल्क है,स्कूल भी खूब हैं।बच्चे पढने जाते नहीं,पाठशालाएं नि:शुल्क है।यह अजीब मुल्क है,निर्बलों पर हर शुल्क है।अगर...

संयुक्त परिवार के बिना 0

संयुक्त परिवार के बिना

बहुत सुँदर पंक्तियाँ संयुक्त परिवार के बिनावो पंगत में बैठ केनिवालों का तोड़ना,वो अपनों की संगत मेंरिश्तों का जोडना,वो दादा की लाठी पकड़गलियों में घूमना,वो दादी का बलैया लेनाऔर माथे को चूमना, सोते वक्त...

रंग बदलते देखा है 0

रंग बदलते देखा है

सुन्दर कविता जिसके अर्थ काफी गहरे हैं……..मैंने .. हर रोज .. जमाने को ..रंग बदलते देखा है ….उम्र के साथ .. जिंदगी को ..ढंग बदलते देखा है .. !!वो .. जो चलते थे ..तो...

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