Category: संझिप्त कहानी

संझिप्त कहानी द्वारा  प्रमुख मुद्दों पर विचार एवं विश्लेषण

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संस्कारों के बारे में

क्या आपको अपने सयुंक्त परिवार के संस्कारों के बारे में कभी आपके माता पिता ने आपको कभी अहसास कराया है। चलिए आज एक पारिवारिक भावपूर्ण प्रसंग का उल्लेख करते हुए एक वृतांत को समझने...

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लौट आता हूँ वापस

लौट आता हूँ वापस घर की तरफ… हर रोज़ थका-हारा,आज तक समझ नहीं आया की जीने के लिए काम करता हूँ या काम करने के लिए जीता हूँ। बचपन में सबसे अधिक बार पूछा...

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अनुभव अनुभव कैसे बनता

अनुभव अनुभव कैसे बनता है और उससे भी ज्यादा यह की अनुभव को लिखते किन शब्दों में है.. चेतना का अनुभव और उसकी व्याख्या दोनों का। जब तक विज्ञान स्पष्टता से अपनी सीमाये नहीं...

धम्म ध्वज 0

बौद्धों का धम्मध्वज

बौद्धों का धम्मध्वज जैसा है वैसा ही क्यों है? 8 जनवरी, 1880 बौद्ध जगत में विशेष महत्व का दिन है क्योंकि इसी दिन ” धम्म ध्वज ” की स्थापना हुई थी। यह धम्म ध्वज...

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जब तक विदाई नहीं

जब तक विदाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं, जी हाँ 5 मई, 1789, राजा साहब ने बैठक शुरू कर दी थी। बगल में गहनों से लदी-फदी रानी बैठी थी। सुनहले कोट में सुशोभित हो...

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एक खूबसूरत ग्रहयोग संवाद

पति पत्नी का एक खूबसूरत ग्रहयोग संवादमैंने एक दिन अपनी पत्नी से पूछा ~क्या तुम्हें बुरा नहीं लगता,मैं बार-बार तुमको बोल देता हूँ,डाँट देता हूँ , फिर भी तुमपति भक्ति में लगी रहती हो,जबकि...

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