क़लम एक कुदाल जुड़िए संस्कृति से ...

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आदिवासियों के गाँवों में

आओ चलते हैं घने जंगलों केआदिवासियों के गाँवों में,जीते हैं पल पलजो संगीनों के छाओं में।काले शरीर पर वस्त्र कमअधिक कष्ट के निशान हैं,सदियों से गुमनामये छोटे छोटे किसान हैं। विकास की हवा कभीचली...

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एक प्यारी सी घरवाली

बेशक घर में होतीएक प्यारी सी घरवाली हैफिर भी दिल में रहतीथोड़ी सी जगह ख़ाली हैलोग समझते हैं सालीतो होती आधी घरवाली हैलेकिन आजकल ये जगहबाहरवाली ने संभाली हैबिना उसके फीकी होलीऔर काली दीवाली...

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पहली बार ऐसा हुआ

एक लड़की थीरात को office सेवापस लौट रही थीदेर भी हो गई थी…पहली बार ऐसा हुआऔर काम भी ज्यादा था तोTime का पता ही नहीं चलावो सीधे auto stand पहुँची | वहाँ एक लड़का...

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आप बीती तुम कहो

आप बीती तुम कहोमुझे मेरी सुनाने दोआओ पास मेरे यापास मुझे तुम आने दोखूब गुजरेगी जब मिलबैठेंगे दीवाने दोसचमुच तुम सुंदर हो बहुतवो नहीं तुम्हारे काबिल थामुट्ठी से फिसली रेत साअब उसको तुम जाने...

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आओ आज बताता हूं

आओ आज बताता हूंक्यूं करता हूं तुमसे प्यारजिस दिन से तुमको देखा हैनहीं पता क्या है संसारसचमुच तुम सुंदर हो बहुतजैसे हो देवी अवतारमेरे जीवन की बगिया मेंतुम हो जैसे बसंत बहारतुम ममता की...

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बाल विवाह~एक कुप्रथा

बाल विवाह~एक कुप्रथागुड्डे और गुड़ियों काव्याह जो रचाती है…अगले ही पल वह ,ख़ुद दुल्हन बन जाती हैं…जो पिता नहीं कह पाती,वह पत्नी क्या कहलाएगी…जो दूध अभी पीती है,वह दूध क्या पिलाएगी… नाम तो दिया...

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