Tagged: किसान

अब मैं अभागा किसान 0

अब मैं अभागा किसान

अब मैं अभागा किसानराशन की कतारों में नज़र आता हूँ..खेतिहर मजदूर अपनेखेतों से बिछड़ने की सज़ा पाता हूँ,साहब देखो इतनीमहंगाई के बाज़ार से कुछ लाता हूँ.. अब मैं अभागा किसानमैं किस्मत का माराअपने बच्चों...

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जब तक विदाई नहीं

जब तक विदाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं, जी हाँ 5 मई, 1789, राजा साहब ने बैठक शुरू कर दी थी। बगल में गहनों से लदी-फदी रानी बैठी थी। सुनहले कोट में सुशोभित हो...

तुम लौटकर कब आओगे 0

सत्ता उभयलिंगी होता है

तुम्हारे व्याकरण में हैतो तुम्हारे तंत्र में भी हैसत्ता उभयलिंगी होता हैउसका कोई लिंग नहीं होता मर्द सत्ता हो कि स्त्री सत्ताफर्क नहीं ही होता हैजब कोई स्त्री, मजदूर, किसानदलित या कि आदिवासीशहरवासी या...

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