Tagged: चुन-चुन कर अपनों ने ही

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आज फिर अभिमन्यु अकेला

मत सोचो ,विचार संकीर्ण , कुंठित मानसिकता ,आज फिर अभिमन्यु अकेला है !त्रियोदश रात्रि की द्वितीय बेला में ,मेरे प्रभू से मेरा साक्षात्कार हुआ !कहने लगे सो जाओ तुम “नंदी”,मत उलझो इन जंजालों में...

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आज फिर अभिमन्यु अकेला

त्रियोदश रात्रि की द्वितीय बेला में ,मेरे प्रभू से मेरा साक्षात्कार हुआ !कहने लगे सो जाओ तुम “नंदी”,मत उलझो इन जंजालों में …..आज फिर अभिमन्यु अकेला है ! क्या पाओगे तुम ,क्या तुमने खोया...

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