Tagged: बेरोजगारी

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अब तो सबको एहसास

अब तो सबको एहसास, होने लगा हैं धीरे धीरे,झूठे वादों पर से,विश्वास टूटने लगा हैं धीरे धीरे।बन्द घरों में दमघुटने लगा हैं धीरे धीरे,बन्द शिराओं में खूनदौड़ने लगा हैं धीरे धीरे। वादों के पिटारों...

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” नेशनलिज्म की राजनिति “

राष्ट्र-निर्माण के लिए राजनीतिक – सामाजिक – आर्थिक उद्देश्य और आवश्यकताएँ प्रमुख हैं ।यही किसी राष्ट्र को एक सूत्र में बाँधती हैं । ” नेशनलिज्म की राजनिति ” के लिए भाषा और धर्म अनिवार्य...

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हाँ मैं बात करूंगा

हाँ मैं इंसान हूँ, हाँ मैं बात करूंगाइंसानियत की बात करूंगा… तुम्हारी रहीसी तुम्हे मुबारक, मैं गरीब की बात करूंगा…. ये सत्ता की गलियां तुम्हे मुबारक, मैं धूप में पिसते मजदूर की बात करूंगा…...

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भयंकर मानसिक तनाव से जूझता

आर्थिक और सामाजिक तनाव से जूझते भारत में बेरोजगारी, गरीबी और अवसरों की कमी ने भारत विद्यार्थियों के तबके को मानसिक रोगों का शिकार बना दिया है. भयंकर मानसिक तनाव से जूझता मानव, भविष्य...

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