Tagged: लोकतंत्र

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कलम का कागज से

आज कलम का कागज सेमै दंगा करने वाला हूँ,मीडिया की सच्चाई कोमैं अब नंगा करने वाला हूँमीडिया जिसको लोकतंत्र काचौंथा खंभा होना था,खबरों की पावनता मेंजिसको गंगा होना थाआज वही दिखता है हमकोवैश्या के...

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लोकतंत्र गणतंत्र और षडयंत्र

लोकतंत्र गणतंत्र और षडयंत्रमेरे देश में गण फुटपाथ पर सोता है,तंत्र कोठी बंगले में सोता है।गण एकलव्य सा निहत्था अकेला हैद्रोणाचार्य के हर छल को झेला है,तंत्र के संग धन है, बल हैगण के...

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मैं अचल हूँ पर

शब्दो की असंख्य रचना के,धरातल पर मैं एक मामूली बच्चा हूँ।शब्द विन्यासः के मामले में,ना जाने क्यों मैं आज भी कच्चा हूँ।मैं अचल हूँ पर,एक कदम चलने को बिकल हूँ…. वो देखो संसद में...

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