Tagged: संसद

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मैं अचल हूँ पर

शब्दो की असंख्य रचना के,धरातल पर मैं एक मामूली बच्चा हूँ।शब्द विन्यासः के मामले में,ना जाने क्यों मैं आज भी कच्चा हूँ।मैं अचल हूँ पर,एक कदम चलने को बिकल हूँ…. वो देखो संसद में...

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फिर भी चुप हैं

संसद की वो कुर्सियां देखो किस कदर बेचैन हैंटूटे सपने ले चले बच्चों के पासकुछ गठरियाँ और पगडियों के साथये जो मजदूर हैंवे कितने मजबूर हैंदेखो कितने लाचारअपने माँ बाप और बच्चों से दूर...

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लोकपाल का हश्र हुआ ?

संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद आखिरकार देश को पांच दशक बाद भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए बहुप्रतीक्षित लोकपाल मिल गया। आज का सवर्णपरस्त समाज अन्ना को दूसरे महात्मा की उपाधि देने...

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